Subtraction

(व्यवकलन)

These are the methods of subtraction in Vedic mathematics.

  1. Ekadhikena Purvena and Param mitra digit
  2. Ekanyunena Purvena and Param mitra digit
  3. Nikhilam navatascharamam Dasatah
  4. Paravartya Yojayet

 

1.      Ekadhikena Purvena and Purak digit (एकाधिकेन पूर्वेण एवं परम मित्र):

Ekadhikena Purvena means “By one more than the previous one”

'पहले से एक अधिक के द्वारा'

सूत्र पर आधारित विधि:

1.    जब ऊपर वाले अंक (वियोज्य) में से नीचे वाला अंक (वियोजक) नही घटया जा सके तो नीचे वाले अंक का परम मित्र ऊपर वाले अंक में जोड़कर योगफल उत्तर के स्थान पर लिख देते हैं।

2.    नीचे वाले अंक के पूर्व अंक पर एकाधिक चिन्ह लगा देते हैं।

3.    यदि ऊपर वाला अंक (वियोज्य) नीचे वाले अंक (वियोजक) से बड़ा हो तो नीचे वाले अंक में परम मित्र जोड़ने की आवश्यकता नही, सामान्य रुप से घटाते हैं।

 

Example: 3274 – 1892

1.      2 < 4. Hence 4-2=2; subtract normally (first digit)

2.      9 > 7; अत: 9 का मित्र 1, 7 में जांड़ते हैं, तथा प्राप्त उत्तर 8 कों उत्तर स्थान के द्वितीय अंक के रुप में लिखते हैं, तथा 9 से पूर्व अंक 8 पर एकाधिक चिन्ह लगाते हैं।

3.       means; 8+1=9, 9>2. Hence a dot on left digit of 8 i.e., 1, Purak of 9 is 1, this is added to upper 2 gives 1+2=3 (third digit)

4.       means 1+1=2, 2<3. Hence 3-2=1 subtract normally (fourth digit)

               Thus answer is 1382.

 

Example: 57725 – 29943

1.      5-3=2, 2 नीचे उत्तर के स्थान पर लिखते हैं।

2.      2<4, 4 का परम मित्र अंक 6 को 2 में जोड़कर योग 8 उत्तर के स्थान पर लिखते हैं। तथा 4 के पूर्व अंक 9 पर एकाधिक चिन्ह लगाते हैं।

3.       का मतलब हैं, 9+1=10, 10>7. 10 का परम मित्र अंक 0, को 7 में जोड़कर योग 7 उत्तर के स्थान पर लिखते हैं। तथा 9 के पूर्व अंक 9 पर एकाधिक चिन्ह लगाते हैं।

4.        का मतलब हैं, 9+1=10, 10>7. 10 का परम मित्र अंक 0, को 7 में जोड़कर योग 7 उत्तर के स्थान पर लिखते हैं। तथा 9 के पूर्व अंक  2 पर एकाधिक चिन्ह लगाते हैं।

5.       का मतलब हैं, 2+1=3, 3<5. अत: 5-3=2, 2 को नीचे उत्तर के स्थान पर लिखते हैं।

 

Example:

1.      घंटा, मिनट तथा सैकण्ड़ के स्तम्भ व्यवस्थित करते हैं।

2.      मिनट तथा सैकण्ड़ के स्तम्भों में आधार चयन करते हैं -

·        दोनों के इकाई स्तम्भों में आधार = 10

·        दोनों के दहाई स्तम्भों में आधार = 6

3.      घण्टे स्तम्भों में आधार = 10

4.      सैकण्ड़ का पहला स्तम्भ: 5-2=3, 3 नीचे उत्तर के स्थान पर लिखते हैं।

5.      सैकण्ड़ का दूसरा स्तम्भ: 1 < 4 अत: 4 का परम मित्र अंक आधार 6 के सापेक्ष = 2, 2 को 1 में जोड़कर प्राप्त योग 3 को नीचे उत्तर स्थान पर लिखते हैं। तथा मिनट के प्रथम स्तम्भ के अंक 3 पर एकाधिक चिन्ह लगाते हैं।  

6.      मिनट का पहला स्तम्भ:  का मतलब 3+1 = 4; 2 < 4, 4 का परम मित्र अंक आधार 10 के सापेक्ष 6 को 2 में जोड़कर योग 8 उत्तर के स्थान पर लिखते हैं। तथा 3 के पूर्व अंक 2 पर एकाधिक चिन्ह लगाते हैं।

7.      मिनट का दूसरा स्तम्भ:  का मतलब 2+1 =3 ; 1 < 3, 3 का परम मित्र अंक आधार 6 के सापेक्ष 3 को 1 में जोड़कर योग 4 उत्तर के स्थान पर लिखते हैं। तथा घंटा के प्रथम स्तम्भ के अंक 7 एकाधिक चिन्ह लगाते हैं।

8.      घंटा का पहला स्तम्भ: का मतलब 7+1 = 8; 4 < 8, अत: 8 का परम मित्र अंक आधार 10 के सापेक्ष 2 को 4 में जोड़कर योग 6 उत्तर के स्थान पर लिखते हैं। तथा 7 के पूर्व अंक 0 पर एकाधिक चिन्ह लगाते हैं।

9.      घंटा का दूसरा स्तम्भ:  का मतलब 0+1 = 1; 2-1=1, 1 नीचे उत्तर के स्थान पर रखते हैं।

 

2.      Ekanyunena Purvena and Purak digit (एकन्यूनेन पूर्वेण व परम मित्र):

Ekanyunena Purvena means “By one less than the previous one.”

'पहले से एक कम के द्वारा'

सूत्र पर आधारित विधि:

1.    जब ऊपर वाले अंक (वियोज्य) में से नीचे वाला अंक (वियोजक) नही घटया जा सके तो नीचे वाले अंक का परम मित्र ऊपर वाले अंक में जोड़कर योगफल उत्तर के स्थान पर लिख देते हैं।

2.    नीचे वाले अंक के पूर्व अंक पर एकन्यून चिन्ह लगा देते हैं।

3.    यदि ऊपर वाला अंक (वियोज्य) नीचे वाले अंक (वियोजक) से बड़ा हो तो नीचे वाले अंक में परम मित्र जोड़ने की आवश्यकता नही, सामान्य रुप से घटाते हैं।

 

Example:  6116-1752

1.      6-2 = 4; 4 को नीचे उत्तर के स्थान पर लिखते हैं।

2.      1 < 5, अत: 5 का परम मित्र अंक 5 को 1 में जोड़कर प्राप्त योग 6 को उत्तर के स्थान पर लिखते हैं। तथा 1 के पूर्व के अंक 1 पर एकन्यून चिन्ह लगाते हैं।  

3.       का मतलब हैं, 1-1 = 0, 0 < 7. 7 के परम मित्र अंक 3, को 0 में जोड़कर प्राप्त योग 3 को उत्तर के स्थान पर लिखते हैं। तथा 1 के पूर्व अंक 6 पर एक न्यून चिन्ह लगाते हैं।

4.       का मतलब हैं, 6-1 = 5, 5-1 = 4, 4 को नीचे उत्तर के स्थान पर लिखते हैं।

 

3.      Nikhilam navatascharamam Dasatah

Nikhilam navatascharamam Dasatah means, “All from nine and last from ten”

    सभी नौ में से परन्तु अन्तिम दस में से

इस विधि का उपयोग किसी शून्यान्त संख्या के सापेक्ष किसी संख्या का पूरक ज्ञात करने में किया जाता हैं, उसके प्रत्येक अंक को 9 में से तथा अन्तिम अंक को 10 में से घटाते हैं। क्रिया के अन्त में शून्यान्त संख्या के मुख्य अंक में से एक न्यून कर घटाया जाता हैं।

 

Example: 10000 -8746

1.      10-6=4, 4 को नीचे उत्तर के स्थान पर लिखते हैं।

2.      9-4=5, 5 को नीचे उत्तर के स्थान पर लिखते हैं।

3.      9-7=2, 2 को नीचे उत्तर के स्थान पर लिखते हैं।

4.      9-8=1, 1 को नीचे उत्तर के स्थान पर लिखते हैं। मुख्य अंक 1 पर एक न्यून चिन्ह लगाते हैं।

5.       का मतलब हैं, 1-1 = 0, 0-0 = 0, 0 को नीचे उत्तर के स्थान पर लिखते हैं।

4.          Paravartya Yojayet: (बीजीय व्यवकलन):

जिस संख्या (वियोजक) को घटाना हो, उसके चिन्ह बदल देते हैं अर्थात् (+) को (-) में तथा (-) को (+) में बदल कर जोड़ देते हैं।

 

Example: (4x3 +3 x2+2 x +4) में से (x3+9x+11) घटाना।

 

1.      पद स्तम्भ के अनुसार गुणांकों कां लिखते हैं।

2.      वियोजक के चिन्ह बदलते हैं।

3.      योग करते हैं।

4.      शेषफल = 3x3 +3 x2-7 x -7