Multiplication

(गुणन संक्रिया)

These are the methods of multiplication in Vedic mathematics.

  1. Ekadhikena Purvena and Antyayor Dasakepi
  2. Ekanyunena Purvena
  3. Nikhilam navatascharamam Dasatah
  4. Urdhva – tiryagbhyam

 

1.      Ekadhikena Purvena and Antyayor Dasakepi (एकाधिकेन पूर्वेण व अन्त्ययोर्दशकेऽपि):

Ekadhikena Purvena means “By one more than the previous one”

‘पहले से एक अधिक के द्वारा’

Antyayor Dasakepi means “numbers of which the last digits added up give 10 or power of 10”

‘अंतिम (चरम) अंको का योग 10 या 10 की घात वाली संख्याओं हो’

The Sutra signifies numbers of which the last digits added up give 10 or power of 10. That means the Sutra works in multiplication of numbers like, 25 and 25, 47 and 43, 62 and 68, 116 and 114, 191 and 109. Note that in each case the sum of the last digit of first number to the last digit of second number is 10 or power of 10. Further the portion of digits or numbers left wards to the last digits remain the same. At that instant use Ekadhikena on left hand side digits. Multiplication of the last digits gives the right hand part of the answer.

 

जिन अंको के चरम (अंतिम) अंकों का योग 10 या 10 की घात हो तथा शेष निखिलम् अंक समान हो की गुणन संक्रिया इस विधि द्वारा की जाती हैं। (जैसे - 12x18, 33x37, 116x114, 191x109)। यहाँ प्रत्येक प्रश्न में चरमं अंकों का योग 10 हैं, तथा शेष निखिलम् अंक समान हैं।

 

सूत्र पर आधारित विधि:

1.    गुणनफल के दो पक्ष होते हैं, दाहिना तथा बायाँ।

2.    चरमं अंकों के गुणनफल को दायीं ओर लिखते हैं।

3.    बायें पक्ष में शेष निखिलम् अंक तथा शेष निखिलम् अंक के एकाधिक का गुणनफल लिखते हैं।

4.    चरमं अंक के योग में जितने शून्य हो, उसके दुगने अंक दायें पक्ष में लिखते हैं। जैसे योग 10 में एक शून्य हैं तो दाहिने पक्ष में दो अंक रखते हैं।

5.    दाहिने पक्ष में यदि अंकों की संख्या कम या अधिक हो तो अंकों को समायोजित करते हैं।

 

A.   चरमं अंकों का योग 10 (last digits added up give 10):

 

Example: 32 X 38

32 X 38

= 3 x 4 / 2 x 8

= 12 /16

= 1216

1.      Sum of last digits is 2+8 =10,

2.      Remaining digits = 3 are same in both numbers.

3.      RHS 2x8 =16,

4.      LHS 3 x (3+1) =12

 

Example: 83 X 87

83 X 87

= 8 x 9 / 3 x 7

= 72 /21

= 7221

1.    चरमं अंकों का योग = 3+7 = 10,

2.    शेष निखिलम् अंक = 8

3.    दाहिना पक्ष = 3 x 7 =21,

4.    बायाँ पक्ष = 8 x (8+1) =72

 

B.   चरमं अंकों का योग 100 (last digits added up give 100):

 

Example: 192 X 108

192 x 108

= 1 x 2 / 92 x 08

= 2 /0736

= 20736

1.      Sum of last digits is 92+08 =100,

2.      Remaining digits =1 is same in both numbers.

3.      RHS 92x08 =0736,

4.      LHS 1 x (1+1) =2

 

Example: 413 X 487

413 X 487

= 4 x 5 / 13 x 87

= 20 /1131

= 201131

1.      चरमं अंकों का योग = 13+87 =100,

2.      शेष निखिलम् अंक = 4

3.      दाहिना पक्ष = 13 x 87 =1131,

4.      बायाँ पक्ष = 4 x (4+1) =20

 

C.   मिश्र भिन्नों का गुणन (multiplication of mixed number):

 

Example: 3½ X 3½

3½ X 3½

= 3 x 4 / ½ x ½

= 12 /Ό

= 12Ό

1.      चरमं अंकों का योग =½ + ½ = 1,

2.      शेष निखिलम् अंक = 3

3.      दाहिना पक्ष = ½ x ½ = Ό,

4.      बायाँ पक्ष = 3 x (3+1) =12

5.       

D.   दशमलव अंकों का गुणन (multiplication of decimal number):

 

Example: 4.5 X 4.5

4.5 x 4.5

= 4 x 5 / 0.5 x 0.5

= 20 /0.25

= 20.25

1.      Sum of last digits is 0.5+0.5 =1,

2.      Remaining digits =4 is same in both numbers.

3.      RHS 0.5 x 0.5 =0.25,

4.      LHS 4 x (4+1) =20

 

Example: 3.25 X 3.75

3.25 X 3.75

= 3 x 4 / 0.25 x 0.75

= 12 /0.1875

= 12.1875

1.      चरमं अंकों का योग = 0.25+0.75 =1,

2.      शेष निखिलम् अंक = 3

3.      दाहिना पक्ष = 0.25 x 0.75 =0.1875,

4.      बायाँ पक्ष = 3 x (3+1) =12

 

2.      Ekanyunena Purvena (एकन्यूनेन पूर्वेण)

दो संख्याओं के गुणन में जब एक संख्या के सभी अंक 9 हो तो एकनयूनेन पूर्वेण विधि द्वारा गुणा किया जाता हैं। जिस संख्या के सभी अंक 9 हो उसे गुणक तथा दूसरी संख्या को गुण्य कहते हैं।

सूत्र पर आधारित विधि:

1.    गुणनफल के दो पक्ष होते हैं, दायाँ तथा बायाँ।

2.    बायाँ पक्ष = गुण्य - 1  

3.    दायाँ पक्ष = गुणक – बायाँ पक्ष

4.    गुणक x गुण्य = गुण्य - 1 / गुणक - बायाँ पक्ष

5.    गुणन संक्रिया में तीन स्थितियाँ बनती हैं।

a.    गुणक में अंकों की संख्या = गुण्य में अंकों की संख्या

b.    गुणक में अंकों की संख्या > गुण्य में अंकों की संख्या

c.     गुणक में अंकों की संख्या < गुण्य में अंकों की संख्या

 

a.    गुणक में अंकों की संख्या = गुण्य में अंकों की संख्या

 

Example: 8 X 9

8 X 9

= 8-1 / 9-7

= 7 / 2

= 72

1.    बायाँ पक्ष = 8 - 1 = 7

2.    दायाँ पक्ष = 9-7 = 2

 

Example: 672 X 999

672 x 999

= 672-1 / 999-671

= 671 / 328

= 671328

1.    LHS= 672-1 = 671

2.    RHS = 999 – 671 = 328

 

b.    गुणक में अंकों की संख्या > गुण्य में अंकों की संख्या

 

Example: 47 X 999

047 x 999

= 047-1 / 999-046

= 46 / 953

= 46953

1.    बायाँ पक्ष = 47-1 = 46

2.    दायाँ पक्ष = 999 - 046 = 953

 

Example: 84 X 99999

84 x 99999

= 00084-1 / 99999-00083

=83 / 99916

= 8399916

1.    LHS= 84 - 1 = 83

2.    RHS = 99999 – 00083 = 99916

 

c.     गुणक में अंकों की संख्या < गुण्य में अंकों की संख्या

1.    गुण्य संख्या का एक न्यून करते हैं।

2.    प्राप्त संख्या के आगे गुणक संख्या यथावत् लिख देते हैं।

3.    इस संख्या में से गुण्य संख्या का एक न्यून घटा देते हैं, शेषफल ही अभीष्ट गुणनफल होता हैं।

 

Example: 73 X 9

73 X 9

= 73-1 / 9

= 72 / 9

= 729 – 72 =657

1.      बायाँ पक्ष = 73 - 1 = 72

2.      दायाँ पक्ष = 9

3.      729 – 72 = 657

 

Example: 672 X 99

672 x 99

= 672-1 / 99

= 671 / 99

= 67199 -671 = 66528

1.    LHS= 672-1 = 671

2.    RHS = 99

3.    67199 – 671 = 66528

 

3.      Nikhilam navatascharamam Dasatah (निखिलम् सूत्र) - आधार

जब दो संख्याएँ, जो आधार 10 , 100 या 10 की घात के निकट हो तो उनका गुणनफल सूत्र निखिलम् - आधार द्वारा ज्ञात किया जाता हैं।

सूत्र पर आधारित विधि:

1.    संख्याओं का निकटतम आधार चुनकर विचलन ज्ञात करते हैं।

विचलन = संख्या - आधार

2.    आधार के सापेक्ष विचलनों को उनकी संख्या के सामने लिखते हैं।

3.    तिरछी रेखा से गुणनफल स्थान के दो भाग करते हैं।

4.    दायें पक्ष में विचलनों का गुणनफल लिखते हैं।

5.    बायें पक्ष में कोई भी एक संख्या तथा दूसरी संख्या के विचलन का योग लिखते हैं।

6.    आधार में जितने शून्य हो, उतने ही अंक दायें पक्ष में रखते हैं।

·         यदि आधार 10 हो तो दायें पक्ष में एक अंक रखेंगे, दो अंक हो तो दहाई का अंक बायें पक्ष में जोड़ देते हैं।

·         यदि आधार 100 हो तो दायें पक्ष में दो अंक रखेंगे, एक अंक हो तो उससे पूर्व 0 लिखते हैं तथा तीन अंक हो तो सैकडे़ का अंक बायें पक्ष में जोड़ देते हैं।

7.    विचलनों का गुणनफल यदि ॠणात्मक हो तो बायें पक्ष से आवश्यकतानुसार अंक लेकर दायें पक्ष को धनात्मक में बदलते हैं।

 

Example: 12 X 14

12          +2

14          +4

____________

= 12 + (+4) / 2x4

Or = 14 + (+2) / 2x4

= 16 / 8

= 168

संकेत -

1.    निकटतम आधार 10; अत:

विचलन = 12 – 10 = +2

विचलन = 14 – 10 = +4

2.    संख्याओं के सामने विचलन लिखते हैं।

3.    तिरछी रेखा से गुणनफल स्थान के दो भाग करते हैं।

4.    दायें पक्ष में विचलनों का गुणनफल लिखते हैं = (+2) x (+4) = 8

5.    बायें पक्ष में एक संख्या व दूसरी संख्या के विचलन का योग लिखते हैं।

= 12+(+4) σ 14+(+2) = 16

6.    अभीष्ट गुणनफल = 168

 

Example: 92 X 86                                       

92          - 08

86          - 14

___________________

= 92 + (-14) / (-08) x (-14)

Or = 86 + (-08) / (-08) x (-14)

= 78 / 112

= 7912

संकेत -

1.    निकटतम आधार 100 अत:

विचलन = 92 – 100 = - 08

विचलन = 86 – 100 = - 14

2.    दायें पक्ष में विचननों का गुणनफल लिखते हैं = (-08) x (-14) = +112

3.    बायें पक्ष में एक संख्या व दूसरी संख्या के विचलन का योग लिखते हैं।

= 92+ (-14) σ 86+ (-08) = 78

4.    दायें पक्ष में 112 के स्थान पर 12 लिखते हैं तथा बायें पक्ष में 1 जोड़ते हैं।

5.    अभीष्ट गुणनफल = 7912

 

Example: 1007 X 1015

1007         +007

1015         +015

_______________________

= 1007 + (+015) / (+007) x (+015)

Or = 1015 + (+007) / (+007) x (+015)

= 1022 / 105

= 1022105

संकेत -

1.    निकटतम आधार 1000 अत:

विचलन = 1007 – 1000 = +007

विचलन = 1015 – 1000 = +015

2.    दायें पक्ष में विचननों का गुणनफल लिखते हैं = (+007) x (+015) = +105

3.    बायें पक्ष में एक संख्या व दूसरी संख्या के विचलन का योग लिखते हैं।

= 1007+ (+015)  σ 1015+ (+007) = 1022

4.    आधार में तीन शून्य हैं, अत: दायें पक्ष में तीन अंक रखते हैं।

5.    अभीष्ट गुणनफल = 1022105

 

Example: 89 X 107

89          - 11

107        + 07

________________________

= 89 + (+07) / (-11) x (+07)

Or = 107 + (-11) / (-11) x (+07)

= 96 / (-77)

= 95 / 100 – 77

= 95 / 23

= 9523

संकेत -

1.    निकटतम आधार 100 अत:

विचलन = 89 – 100 = - 11

विचलन = 107 – 100 = + 07

2.    दायें पक्ष में विचलनों का गुणनफल लिखते हैं = (-11) x (+07) = (-77)

3.    बायें पक्ष में एक संख्या व दूसरी संख्या के विचलन का योग लिखते हैं।

= 89 + (+07) σ 107+ (-11) = 96

4.    दायें पक्ष में दो अंकों वाली धनात्मक संख्या हो इसके लिए बायें पक्ष से 1 दायें पक्ष में लेते हैं।

5.    बायें पक्ष में शेष बचे = 96 – 1 = 95

6.    दायें पक्ष में 1 का स्थानीय मान = 100, अत: दायाँ पक्ष = 100 – 77 = 23

7.    अभीष्ट गुणनफल = 9523

 

तीन संख्याओं का गुणा -

गुणन संक्रिया में तीन खण्ड़ बनाते हैं।

  1. प्रथम खण्ड़ = कोई भी एक संख्या + (शेष दो संख्याओं के विचलन का योग)
  2. मध्य खण्ड़ = दो-दो विचलनों के गुणनफल का योग
  3. तीसरा खण्ड़ = तीनों विचलनों का गुणन फल

 

Example: 91 X 93 X 96

91          - 09

93          - 07

96          - 04

__________________________________________

= 91 + (-07) + (-04) / 63+28+36 / (-09) x (-07) X (-04)

= 91-07-04 / 127/ (-252)

= 80 / 127/ (-252)

= 8127 / (-252)

= 8127-2 / (-52)

= 8125 / (-52)

= 8124 / 100-52

= 8124 / 48

= 812448

संकेत -

1.    निकटतम आधार 100 अत:

विचलन = 91 – 100 = - 09

विचलन = 93 – 100 = - 07

विचलन = 96 – 100 = - 04

2.    तीसरे खण्ड़ में तीनों विचलनों का गुणनफल लिखते हैं।

= (-09) x (-07) x (-04) = (-252)

3.    मध्य खण्ड़ में दो-दो विचलनों के गुणनफल का योग लिखते हैं।

= (-09 x -07) + (-07 x -04) + (-04 x -09) = 63+28+36 = 127

4.    प्रथम खण्ड़ में कोई एक संख्या तथा शेष दो संख्याओं के विचलनों का योग लिखते हैं।

= 91 + (-07) + (-04)  σ 93 + (-09) + (-04)  σ 96 + (-09) + (-07) = 80

5.    आधार में जितने शून्य हो मध्य तथा तीसरे खण्ड़ में उतने ही अंक होने चाहिऐ, अत: अंकों को समायोजित करते हैं।

6.    अभीष्ट गुणनफल = 812448

 

 

 

4.      Nikhilam (निखिलम् सूत्र) – उपाधार प्रयोग

जब दो संख्याएँ, जो आधार 10 , 100 या 10 की घात के निकट नही हो तो उनका गुणनफल सूत्र निखिलम् - उपाधार द्वारा ज्ञात किया जाता हैं।

सूत्र पर आधारित विधि:

1.    संख्याओं का निकटतम उपाधार चुनकर विचलन ज्ञात करते हैं।

विचलन = संख्या - उपाधार

2.    उपाधार के सापेक्ष विचलनों को उनकी संख्या के सामने लिखते हैं।

3.    तिरछी रेखा से गुणनफल स्थान के दो भाग करते हैं।

4.    दायें पक्ष में विचलनों का गुणनफल लिखते हैं।

5.    बायें पक्ष में कोई भी एक संख्या तथा दूसरी संख्या के विचलन का योग कर उसे उपाधार अंक से गुणा कर लिखते हैं।

6.    उपाधार में जितने शून्य हो, उतने ही अंक दायें पक्ष में रखते हैं।

·         यदि आधार 10 हो तो दायें पक्ष में एक अंक रखेंगे, दो अंक हो तो दहाई का अंक बायें पक्ष में जोड़ देते हैं।

·         यदि आधार 100 हो तो दायें पक्ष में दो अंक रखेंगे, एक अंक हो तो उससे पूर्व 0 लिखते हैं तथा तीन अंक हो तो सैकडे़ का अंक बायें पक्ष में जोड़ देते हैं।

7.    विचलनों का गुणनफल यदि ॠणात्मक हो तो बायें पक्ष से आवश्यकतानुसार अंक लेकर दायें पक्ष को धनात्मक में बदलते हैं।

 

Example: 32 X 34

32          +2       

34          +4

____________

= [32 + (+4)] x 3 / 2x4

Or = [34 + (+2)] x 3 / 2x4

= 36 x 3 / 8

= 108 / 8 = 1088

संकेत -

1.    निकटतम आधार 10, उपाधार अंक 3 तथा उपाधार = 10 x 3 = 30 अत:

विचलन = 32 – 30 = +2

विचलन = 34 – 30 = +4

2.    दायें पक्ष में विचलनों का गुणनफल लिखते हैं।

= (+2) x (+4) = 8

3.    बायें पक्ष में एक संख्या व दूसरी संख्या के विचलन का योग को उपाधार अंक से गुणा कर लिखते हैं।

= [32+ (+4)] x 3 σ [34+ (+2)] x 3 = 36 x 3 = 108

4.    अभीष्ट गुणनफल = 1088

 

Example: 54 X 57

54          +4       

57          +7

____________

= [54 + (+7)] x 5 / 4x7

Or = [57 + (+4)] x 5 / 4x7

= 61 x 5 / 28

= 305 / 28

= 305 / 28

= 305+2 / 8

= 3078

संकेत -

1.    निकटतम आधार 10, उपाधार अंक 5 तथा उपाधार = 10 x 5 = 50 अत:

विचलन = 54 – 50 = +4

विचलन = 57 – 50 = +7

2.    दायें पक्ष में विचलनों का गुणनफल लिखते हैं।

= (+4) x (+4) = 28

3.    बायें पक्ष में एक संख्या व दूसरी संख्या के विचलन का योग को उपाधार अंक से गुणा कर लिखते हैं।

= [54+ (+7)] x 5 σ [57+ (+4)] = 61 x 5 = 305

4.    दायें पक्ष में एक अंक रखते हैं, अत: 2 को बायें पक्ष में जोड़ते हैं।

5.    बायाँ पक्ष = 305+2 = 307 तथा दायाँ पक्ष = 8

6.    अभीष्ट गुणनफल = 3078

तीन संख्याओं का गुणा -

गुणन संक्रिया में तीन खण्ड़ बनाते हैं।

  1. प्रथम खण्ड़ = उपाधार संख्या का वर्ग x [कोई भी एक संख्या + शेष दो संख्याओं के विचलन का योग]
  2. मध्य खण्ड़ = [दो-दो विचलनों के गुणनफल का योग] x उपाधार अंक
  3. तीसरा खण्ड़ = तीनों विचलनों का गुणन फल

 

Example: 21 X 23 X 26

21          +1

23          +3

26          +6

__________________________________________

= 22 [26+3+1] / 2 [3+18+6] / (+1) (+3) (+6)

= 4 x 30 / 2 x 27 / 18

= 120 / 54/ 18

= 120 / 55 / 8

= 12558

संकेत -

1.    निकटतम आधार 10, उपाधार अंक 2 तथा उपाधार = 10 x 2 = 20; अत:

विचलन = 21 – 20 = +1

विचलन = 23 – 20 = +3

विचलन = 26 – 20 = +6

2.    तीसरे खण्ड़ में तीनों विचलनों का गुणनफल लिखते हैं।

= (+1) x (+3) x (+6) = 18

3.    मध्य खण्ड़ में दो-दो विचलनों के गुणनफल के योग को उपाधार अंक से गुणा कर लिखते हैं।

= [(+1 x +3) + (+3 x+6) + (+1 x+6)] x 2 = [3+18+6] = 27 x 2 = 54

4.    प्रथम खण्ड़ में उपाधार संख्या का वर्ग x [कोई भी एक संख्या + शेष दो संख्याओं के विचलन का योग] लिखते हैं।

= 22 [21 + 3 + 6]  σ 22 [23 + 1 +6]  σ 22 [26 + 1 + 3] = 4 x 30= 120

5.    आधार में जितने शून्य हो मध्य तथा तीसरे खण्ड़ में उतने ही अंक होने चाहिऐ, अत: अंकों को समायोजित करते हैं।

6.    अभीष्ट गुणनफल = 12558

 

5.      Urdhva tiryak sutra (ऊर्ध्व तिर्यक सूत्र)

यह सूत्र दो शब्दों से मिलकर बना होता हैं - 'ऊर्ध्व' तथा 'तिर्यक'। ऊधर्व का अर्थ हैं 'ठीक ऊपर या सीधा या खड़ा' तथा इसकी क्रिया हैं 'ऊपर नीचे लिखे अंकों का गुणन'। तिर्यक का अर्थ हैं 'तिरछा' तथा इसकी क्रिया हैं 'तिरछे लिखे अंकों का गुणन'।

 

सूत्र पर आधारित विधि -

सर्वप्रथम अंकों के स्तम्भ बनाकर उनके समूह बनाते हैं।

स्तम्भ रचना-

1.    गुण्य तथा गुणक संख्याओं को ऊपर-नीचे लिखते हैं।

2.    किसी संख्या में यदि अंक कम हो तो संख्या से पहले शून्य लगाते हैं।

3.    इस प्रकार इकाई स्थान पर लिखे दोनों अंकों से इकाई स्‍थान का स्तम्भ, दहाई स्थान पर लिखे दोनों अंकों से दहाई स्‍थान का स्तम्भ तथा सैकड़े स्थान पर लिखे दोनों अंकों से सैकड़े स्‍थान का स्तम्भ बनता हैं।

समूह रचना-

1.    इन स्तम्भों की सहायता से समूह रचना होती हैं।

समूह संख्या = स्तम्भ संख्या x (2 – 1)

जैसे-

दो अंकों वाली संख्या के गुणन में समूह = 2 x (2 -1) = 3

तीन अंकों वाली संख्या के गुणन में समूह = 3 x (2 -1) = 5 बनते हैं।

2.    इकाई स्थान का स्तम्भ पहला समूह, इकाई व दहाई स्थान के स्तम्भों से मिलकर दूसरा समूह तथा इकाई, दहाई व सैकड़े स्थान के स्तम्भों से मिलकर तीसरा समूह बनता हैं।

3.    मध्य समूह सबसे बड़ा तथा संख्या में अंकों के बराबर होता हैं।

4.    मध्य समूह के बायीं ओर समूह बनाते समय मध्य समूह मे से क्रमश:पहला समूह, दूसरा समूह कम करते हैं।

5.    जब अन्तिम समूह एक स्तम्भ का रह जाए तो समूह निर्माण पूर्ण हो जाता हैं।

समूह गुणनफल-

1.    किसी भी समूह में संकेतों की संख्या उसके स्तम्भ संख्या के समान होती हैं।

2.    विषम स्थान पर बने समूह में केवल एक ही ऊर्ध्व () संकेत होता हैं, जो प्र‍थम, अन्तिम तथा मध्य समूह के मध्य स्तम्भ में लगता हैं।

3.    सम स्थान पर बने समूह में स्तम्भ संख्या भी सम होती हैं, तथा सभी संकेत तिर्यक ( या ) जोड़े में होते हैं।

4.    संकेतों के अनुसार अंकों का गुणा कर समूह का गुणनफल ज्ञात करते हैं।

5.    समूह का गुणनफल ज्ञात करने के पश्चात प्राप्त गुणनफलों का योग करते समय समूह के स्थानीयमान का ध्यान रखते हैं, पहले समूह का स्थानीयमान इकाई, दूसरे समूह का स्थानीयमान दहाई, तीसरे समूह का स्थानीयमान सैकड़ा तथा चौथें समूह का स्थानीयमान हजार होता हैं।

 

Example: 627 X 145

संकेत -

1.    दोनों संख्याओं में तीन अंक हैं, अत: पांच स्तम्भ बनेंगे।

2.    प्रथम स्तम्भ को ऊर्ध्व गुणा करने पर प्राप्त 35 के इकाई अंक 5 को I पंक्ति के इकाई स्थान पर तथा 3 को II पंक्ति के दहाई के स्थान पर लिखते हैं।

3.    दूसरे स्तम्भ में दो तिर्यक गुणा कर दोनों तिर्यक गुणनफल को जोड़ने पर प्राप्त 38 के इकाई अंक 8 को I पंक्ति के दहाई स्थान पर तथा 3 को II पंक्ति के सैकड़े स्थान पर लिखते हैं।

4.    तीसरे स्तम्भ में दो तिर्यक तथा एक ऊर्ध्व गुणा कर दोनों तिर्यक व ऊर्ध्व गुणनफल को जोड़ने पर प्राप्त 45 के इकाई अंक 5 को I पंक्ति के सैकड़े स्थान पर तथा 4 को II पंक्ति के हजार के स्थान पर लिखते हैं।

5.    चौथे स्तम्भ में दो तिर्यक गुणा कर दोनों तिर्यक गुणनफल को जोड़ने पर प्राप्त 26 के इकाई अंक 6 को I पंक्ति के हजार स्थान पर तथा 2 को II पंक्ति के दस हजार के स्थान पर लिखते हैं।

6.    पांचवें स्तम्भ में ऊर्ध्व गुणा करने पर प्राप्त 6 को I पंक्ति के दस हजार स्थान पर लिखते हैं।

7.    अन्त में सभी पदों का योग करने पर अभीष्ट गुणनफल प्राप्त होता हैं।

 

Example: 124 X 132          

1.      4 X 2 = 8. First digit = 8

2.      (2 X 2) + (3 X 4) = 4 + 12 = 16. The digit 6 is retained and 1 is carried over to left side. Second digit = 6.

3.      (1 X 2) + (2 X 3) + (1 X 4) = 2 + 6 + 4 =12. The carried over 1 of above step is added i.e., 12 + 1 = 13. Now 3 is retained and 1 is carried over to left side. Thus third digit = 3.

4.      (1X 3) + (2 X 1) = 3 + 2 = 5. The carried over 1 of above step is added i.e., 5 + 1 = 6. It is retained. Thus fourth digit = 6.

5.      (1 X 1) = 1. As there is no carried over number from the previous step it is retained. Thus fifth digit = 1.

1 2 4

X 1 3 2

________

1 5 2 6 8

1 1

________

1 6 3 6 8

 

 

6.      Urdhva tiryak sutra and Vinculum (ऊर्ध्व तिर्यक व विनकुलम् प्रयोग)

जब बड़े अंकों की संख्याओं का गुणा करना हो तो सूत्र ऊर्ध्व तिर्यक तथा विनकुलम् संख्या प्रयोग कर आसानी से गुणा किया जा सकता हैं। इसके लिए बड़े अंकों की संख्या को विनकुलम् संख्या में बदल कर ऊर्ध्व तिर्यक सूत्र से गुणा करते हैं, तथा अन्त में प्राप्त ॠणांक युक्त गुणनफल को सामान्य संख्या में बदल देते हैं।

 

Example: 966 X 973

संकेत -

1.    निखिलम् विधि द्वारा संख्या को ॠणात्मक संख्या में बदलते हैं।            

2.    प्रथम स्तम्भ को ऊर्ध्व गुणा (X3) करने पर प्राप्त  के इकाई अंक  को I पंक्ति के इकाई स्थान पर तथा  को II पंक्ति के दहाई के स्थान पर लिखते हैं।

3.    दूसरे स्तम्भ के दो तिर्यक गुणा (X तथा X3) कर, दोनों तिर्यक गुणनफल को जोड़ने पर प्राप्त 3 को I पंक्ति के दहाई के स्थान पर लिखते हैं।

4.    तीसरे स्तम्भ के दो तिर्यक (X0 तथा 0X3) तथा एक ऊर्ध्व (X) गुणा कर दोनों तिर्यक व ऊर्ध्व गुणनफल को जोड़ने पर प्राप्त 9 को I  पंक्ति के सैकड़े के स्थान पर लिखते हैं।

5.    चौथे स्तम्भ के चार तिर्यक गुणा (1X3, 1X, 0X तथा 0X) कर, गुणनफल को जोड़ने पर प्राप्त  को I पंक्ति के हजार के स्थान पर लिखते हैं।

6.    पांचवें स्तम्भ के दो तिर्यक (X1 तथा X1) तथा एक ऊर्ध्व (0X0) गुणा कर दोनों तिर्यक व ऊर्ध्व गुणनफल को जोड़ने पर प्राप्त  को I  पंक्ति के दस हजारवें स्थान पर लिखते हैं।

7.    छठे स्तम्भ के दो तिर्यक गुणा (0X1 तथा 0X1) कर, दोनों तिर्यक गुणनफल को जोड़ने पर प्राप्त 0 को I पंक्ति के लाखवें स्थान पर लिखते हैं।

8.    सातवें स्तम्भ को ऊर्ध्व गुणा (1X1) करने पर प्राप्त 1 को I पंक्ति के दस लाखवें स्थान पर लिखते हैं।

9.    अन्त में सभी पदों का योग करने पर अभीष्ट गुणनफल प्राप्त करते हैं, जो ॠणात्मक संख्या हैं, इसे धनात्मक संख्या में निम्नानुसार बदलते हैं।

अभीष्ट गुणनफल = 939918