Addition

योग संक्रिया

Sudhikaran process:

1.      2 + 6 = 8, 8 + 4 = 12, so a dot on 4 and 2 + 7 = 9 the answer retained under column 1st.

2.      One dot from column 1st treated as 1, is carried over to column 2nd, Thus 1 + 6 = 7, 7 + 8 = 15, a “dot’; is placed on 8 and 5+2=7, 7 + 3 = 10 i.e. 0 is written under column 2nd and a dot for is placed on the top of 3.

3.      The number of dots counted in column 2nd is 2. Hence the number 2 is carried over column 3rd, 2 + 1 = 3, 3+5=8, 8 + 6 = 14 a dot on number 6 and 4 + 4 = 8, Thus 8 is placed under column 3rd.

4.      Finally, the number of dots in column 3rd is counted. It is ‘1’ only. So it carried over to 1000th place. As there is no 4th column, 1 is the answer for 4th column. Thus the answer is 1809.

 

Ekadhikena Purvena (एकाधिकेन पूर्वेण):

सूत्र पर आधारित विधि:

1.    योग करते समय जिस अंक पर 10 या 10 से अधिक अंक हो जाए उस अंक से पहले वाले अंक पर एकाधिक चिन्ह लगाते हैं, तथा योगफल में से 10 घटाकर शेषफल को अगले अंक में जोड़ते हैं।

2.    इस प्रकार योग करते समय एकाधिक चिन्ह लगाते रहते हैं, तथा योगफल को योग के स्थान पर लिखते हैं।

3.    यही प्रक्रिया अन्य स्तम्भों के अंकों को जोड़ते समय अपनाई जाती हैं।

 

Example:

 

 

संकेत

1.    प्रथम स्तम्भ में: 5+6=11, अत: 6 से पूर्व अंक 8 पर एकाधिक चिन्ह लगाते हैं।

2.    11 के इकाई अंक 1 में 8 जोड़ते हैं, 1+8=9

3.    9+9=18, अत: 9 के पूर्व अंक 0 पर एकाधिक चिन्ह लगाते हैं, तथा 18 का इकाई अंक नीचे उत्तर के स्थान पर लिख देते हैं।

4.    अन्य स्तम्भों का योग इसी प्रकार से करते हैं।

 

Ekadhikena Purvena + Digit ending with Zero (एकाधिकेन पूर्वेण एवं शून्यान्त संख्या प्रयोग):

 

सूत्र पर आधारित विधि:

1.    योग करते समय संख्या के दो-दो या तीन-तीन अंकों की संख्याओं को जोड़ा जाता हैं। दो संख्याओं में से एक संख्या को शून्यान्त बनाते हैं, जिसकी न्यूनता दूसरी संख्या से पूरी करते हैं।

2.    दोनो नई संख्याओं को जोड़ते हैं, प्राप्त योगफल यदि 100 या 1000 से अधिक हो तो निश्चित पूर्व अंक पर एकाधिक चिन्ह लगाते हैं। तथा शेषफल को अगली संख्या में जोड़ते हैं।

3.    अन्त में अन्तिम शेषफल को उत्तर के स्थान पर लिखते हैं।

 

Example:

 

 

संकेत

1.    इकाई तथा दहाई के अंकों को जोड़ते हैं।

2.    98+59=98+(2+57)=100+57=157; 59 से पूर्व अंक 4 पर एकाधिक चिन्ह लगाते हैं।

3.    शेष 57+32=57+(2+30)=59+30=89

4.    89+47=89+(11+36)=100+36=136; 47 से पूर्व अंक 5 पर एकाधिक चिन्ह लगाते हैं। 36 को नीचे उत्तर के स्थान पर लिख देते हैं।

5.    अब सैंकड़े तथा हजार के अंकों को जोड़ते हैं।

6.    49+(1+24)=50+24=74; 74+19=(73+1)+19=73+20=93

7.    93+(1+65)=93+(1+6+59)=100+59=159; 159 को नीचे उत्तर के स्थान पर लिख देते हैं।

 

Example:

संकेत:

1.      घंटा, मिनट तथा सैकण्ड़ के स्तम्भ व्यवस्थित करते हैं।

2.      मिनट तथा सैकण्ड़ के स्तम्भों में आधार चयन करते हैं।

·        मिनट तथा सैकण्ड़ के इकाई स्तम्भों में आधार = 10

·        मिनट तथा सैकण्ड़ के दहाई स्तम्भों में आधार = 6

3.      घंटे के स्तम्भों में आधार = 10

4.      मिनट तथा सैकण्ड़ के प्रथम स्तम्भ के अंकों को जोड़ते समय जिस अंक पर योग 10 हो उसके पूर्व अंक पर एकाधिक चिन्ह लगा देते हैं, अन्त में योग नीचे लिख देते हैं, मिनट तथा सैकण्ड़ के द्वितीय स्तम्भ के अंकों को जोड़ते समय जिस अंक पर योग 6 या 6 से अधिक हो उसके पूर्व अंक पर एकाधिक चिन्ह लगा देते हैं, अन्त में योग नीचे लिख देते हैं।

5.      घंटे के प्रथम स्तम्भ के अंकों को जोड़ते समय जिस अंक पर योग 10 हो उसके पूर्व अंक पर एकाधिक चिन्ह लगा देते हैं, अन्त में योग नीचे लिख देते हैं। तथा द्वितीय स्तम्भ के अंकों को जोड़ कर अन्त में योग नीचे लिख देते हैं।

 

बीजीय संकलन:

बीजीय व्यंजकों का योग करते समय समान पदों के गुणांकों को निश्चित स्तम्भ में लिखकर स्तम्भानुसार जोड़ते हैं।

 

Example: 4x3 -3 x2+2 x -4, x3-9x+11, 3x3 +5 x2+6 x -8

 

 

संकेत:

1.      पद स्तम्भ के अनुसार गुणांकों को लिखते हैं।

2.      गुणांकों को स्तम्भानुसार जोड़ देते हैं।

3.      योगफल = 8x3 +2 x2- x -1