Cubing

(धनफल)

These are the methods of cubing in Vedic mathematics.

  1. Sutra Nikhilam
  2. Anurupyena
  3. Ekadhikena Purvena

 

1.      Sutra Nikhilam (सूत्र निखिलम्) - आधार

जब संख्या आधार 10 , 100 या 10 की घात के निकट हो तो उसका धनफल, सूत्र निखिलम्-आधार द्वारा ज्ञात किया जाता हैं।

सूत्र पर आधारित विधि-

1.    संख्या का निकटतम आधार चुनकर विचलन ज्ञात करते हैं।

विचलन = संख्या आधार

2.    आधार के सापेक्ष विचलन को संख्या के सामने लिखते हैं।

3.    तिरछी रेखा से धन स्थान के तीन खण्ड़ करते हैं।

         प्रथम खण्ड़ = संख्या + विचलन x 2

         मध्य खण्ड़ = 3 x (विचलन) 2

         तृतीय खण्ड़ = (विचलन) 3

4.    आधार में जितने शून्य हो, उतने ही अंक क्रमशः मध्य एवं तृतीय खण्ड़ में रखते हैं।

         यदि आधार 10 हो तो मध्य व तृतीय खण्ड़ में एक अंक रखेंगे।

         यदि आधार 100 हो तो मध्य व तृतीय खण्ड़ में दो अंक रखेंगे।

         तृतीय खण्ड़ में प्राप्त धनफल यदि ॠणात्मक हो तो उसे मध्य खण्ड़ से एक अंक लेकर धनात्मक में समायोजित करते हैं।

         आवश्यकता पड़ने पर अंको को समायोजित करते हैं।

 

Example: 123 =12 X 12 X 12

12 +2

__________________

= 12 + (2X2) / 3X22 / 23

= 16 / 12 / 8 = 1728

संकेत -

1.    निकटतम आधार 10 अतः विचलन = 12 10 = +2

2.    तिरछी रेखा से उत्तर वाले भाग के तीन हिस्से बनाते हैं।

3.    प्रथम खण्ड़ = 12 + (2X2) = 12+4= 16

4.    मध्य खण्ड़ = 3X22 = 3X4= 12

5.    तृतीय खण्ड़ = 23 = 8

6.    अभीष्ट धनफल = 1728

 

Example: 1023 =102 X 102 X 102

102 +02

___________________________

= 102 + (2X2) / 3X (02)2 / (02)3

= 106 / 12 / 08 = 1061208

संकेत -

1.    निकटतम आधार 100 अतः विचलन = 102 100 = +02

2.    तिरछी रेखा से उत्तर वाले भाग के तीन हिस्से बनाते हैं।

3.    प्रथम खण्ड+ = 102 + (2X2) = 12+4= 106

4.    मध्य खण्ड़ = 3X(02)2 = 3X4= 12

5.    तृतीय खण्ड़ = (02)3 = 08

6.    अभीष्ट धनफल = 1061208

 

Example: 83 =8 X 8 X 8

8 -2

________________________

= 8 + (2X-2) / 3X (-2)2 / (-2)3

= 8-4 / 3X4 / - 8

= 4 / 12 /- 8

= 4 / 11 / 10 - 8

= 4 /11 / 2 = 512

संकेत -

1.    निकटतम आधार 10 अतः विचलन = 8 10 = -2

2.    तिरछी रेखा से उत्तर वाले भाग के तीन हिस्से बनाते हैं।

3.    प्रथम खण्ड = 8 + (2X-2) = 8-4= 4

4.    मध्य खण्ड़ = 3X(-2)2 = 3X4= 12

5.    तृतीय खण्ड़ = (-2)3 = - 8

6.    तृतीय खण्ड़ में प्राप्त धनफल ॠणात्मक हैं, अतः मध्य खण्ड़ से एक अंक लेकर धनात्मक में समायोजित करते हैं।

7.    अभीष्ट धनफल = 512

 

Example: 983 = 98 X 98 X 98

98 -02

____________________________

= 98 + (2X-2) / 3X (-02)2 / (-02)3

= 98-4 / 3X4 / - 08

= 94 / 12 /- 08

= 94 / 11 / 100 - 08

= 94 /11 / 92 = 941192

संकेत -

1.    निकटतम आधार 100 अतः विचलन = 98 100 = -02

2.    तिरछी रेखा से उत्तर वाले भाग के तीन हिस्से बनाते हैं।

3.    प्रथम खण्ड = 98 + (2X-2) = 98-4= 94

4.    मध्य खण्ड़ = 3X(-2)2 = 3X4= 12

5.    तृतीय खण्ड़ = (-02)3 = - 08

6.    तृतीय खण्ड़ में प्राप्त धनफल ॠणात्मक हैं, अतः मध्य खण्ड़ से एक अंक लेकर धनात्मक में समायोजित करते हैं।

7.    अभीष्ट धनफल = 941192

 

2.      Sutra Nikhilam (सूत्र निखिलम्) - उपाधार

किसी भी संख्या का धनफल, सूत्र निखिलम् - उपाधार द्वारा आसानी से ज्ञात किया जा सकता हैं।

सूत्र पर आधारित विधि -

1.    संख्या का निकटतम उपाधार चुनकर विचलन ज्ञात करते हैं।

विचलन = संख्या - उपाधार

2.    उपाधार के सापेक्ष विचलन को संख्या के सामने लिखते हैं।

3.    तिरछी रेखा से धन स्थान के तीन खण्ड़ करते हैं।

         प्रथम खण्ड़ = (उपाधार अंक) 2 x(संख्या + विचलन x 2)

         मध्य खण्ड़ = उपाधार अंक x {3 x (विचलन) 2}

         तृतीय खण्ड़ = (विचलन) 3

4.    आधार में जितने शून्य हो, उतने ही अंक क्रमशः मध्य एवं तृतीय खण्ड़ में रखते हैं।

         यदि आधार 10 हो तो मध्य व तृतीय खण्ड़ में एक अंक रखेंगे।

         यदि आधार 100 हो तो मध्य व तृतीय खण्ड़ में दो अंक रखेंगे।

         तृतीय खण्ड़ में प्राप्त धनफल यदि ॠणात्मक हो तो उसे मध्य खण्ड़ से एक अंक लेकर धनात्मक में समायोजित करते हैं।

 

Example: 223 =22 X 22 X 22

22 +2

__________________________

= 22 {22 + (2X2)} / 2 X {3X22} / 23

= 4 X 26 / 2 X 12 / 8

= 104 / 24 / 8 = 10648

संकेत -

1.    आधार 10, उपाधार = 10 X 2, उपाधार अंक = 2

2.    अतः विचलन = 22 20 = +2

3.    तिरछी रेखा से धन स्थान के तीन खण्ड़ करते हैं।

4.    प्रथम खण्ड़ = 22 {22 + (2X2)} = 4 X 26= 106

5.    मध्य खण्ड़ = 2 X {3X22}= 2 X 12 = 24

6.    तृतीय खण्ड़ = 23 = 8

7.    अभीष्ट धनफल = 10648

 

Example: 3023 =302 X 302 X 302

302 +02

____________________________________

= 32 {302 + (2X02)} / 3 X {3X (02)2} / (02)3

= 9 X 306 / 3 X 12 / 08

= 2754 / 36 / 08 = 27543608

संकेत -

1.    आधार 100, उपाधार = 100 X 3, उपाधार अंक = 3

2.    अतः विचलन = 302 300 = +02

3.    तिरछी रेखा से धन स्थान के तीन खण्ड़ करते हैं।

4.    प्रथम खण्ड़ = 32 {302 + (2X02)} = 9 X 306= 2754

5.    मध्य खण्ड़ = 3 X {3X(02)2}= 3 X 12 =36

6.    तृतीय खण्ड़ = (02)3 = 8

7.    अभीष्ट धनफल = 27543608

 

3.      Anurupyena

दो अंकों की किसी भी संख्या का धनफल आनुरूप्येण विस्तार विधि द्वारा ज्ञात किया जाता हैं।

सूत्र पर आधारित विधि -

1.    धनफल के लिए चार खण्ड़ बनाते हैं।

2.    बाँयी ओर से संख्या के इकाई अंक के विस्तार से चारों खण्ड़ भरते हैं।

         प्रथम खण्ड़ में 1

         दूसरे खण्ड़ में इकाई अंक

         तीसरे खण्ड़ में इकाई अंक का वर्ग

         चौथे खण्ड़ में इकाई अंक का धन लिखते हैं।

3.    उपरोक्त विस्तार के ठीक नीचे दूसरी पंक्ति में दहाई अंक का विस्तार लिखते हैं।

         चौथे खण्ड़ में 1

         तीसरे खण्ड़ में दहाई अंक

         दूसरे खण्ड़ में दहाई अंक का वर्ग

         प्रथम खण्ड़ में दहाई अंक का धन लिखते हैं।

4.    दोनों पंक्तियों का खण्ड़वार ऊर्ध्व गुणन कर गुणनफल तीसरी पंक्ति में लिखते हैं।

5.    तीसरी पंक्ति के दूसरे तथा तीसरे खण्ड़ का दुगना उन्हीं खण्ड़ों में संख्याओं के नीचे लिख देते हैं।

6.    अंत में खण्ड़वार योग करने पर अभीष्ट संख्या का धनफल प्राप्त होता हैं। योग करते समय एक खण्ड़ में एक ही अंक लिखते हैं।

 

Example: 453 = 45 X 45 X 45

 

 

संकेत

1.   प्रथम पंक्ति में इकाई के अंक 5 का विस्तार, प्रथम खण्ड़ में 1, दूसरे खण्ड़ में इकाई अंक (5), तीसरे खण्ड़ में इकाई अंक का वर्ग (25) तथा चौथे खण्ड़ में इकाई अंक का धन (125) लिखते हैं।

2.   दूसरी पंक्ति में दहाई के अंक 4 का विस्तार, चौथे खण्ड़ में 1, तीसरे खण्ड़ में दहाई अंक (4), दूसरे खण्ड़ में दहाई अंक का वर्ग (16) तथा प्रथम खण्ड़ में दहाई अंक का धन (64) लिखते हैं।

3.   दोनों पंक्तियों का खण्ड़वार ऊर्ध्व गुणन कर गुणनफल तीसरी पंक्ति में लिखते हैं।

4.   तीसरी पंक्ति के दूसरे तथा तीसरे खण्ड़ का दुगना उन्हीं खण्ड़ों में संख्याओं के नीचे लिख देते हैं, तथा अंत में खण्ड़वार योग करने पर अभीष्ट संख्या का धनफल प्राप्त होता हैं।

 

Example: 413 = 41 X 41 X 41

 

 

संकेत

1.   प्रथम पंक्ति में इकाई के अंक 1 का विस्तार, प्रथम खण्ड़ में 1, दूसरे खण्ड़ में इकाई अंक (1), तीसरे खण्ड़ में इकाई अंक का वर्ग (1) तथा चौथे खण्ड़ में इकाई अंक का धन (1) लिखते हैं।

2.   दूसरी पंक्ति में दहाई के अंक 4 का विस्तार, चौथे खण्ड़ में 1, तीसरे खण्ड़ में दहाई अंक (4), दूसरे खण्ड़ में दहाई अंक का वर्ग (16) तथा प्रथम खण्ड़ में दहाई अंक का धन (64) लिखते हैं।

3.   दोनों पंक्तियों का खण्ड़वार ऊर्ध्व गुणन कर गुणनफल तीसरी पंक्ति में लिखते हैं।

4.   तीसरी पंक्ति के दूसरे तथा तीसरे खण्ड़ का दुगना उन्हीं खण्ड़ों में संख्याओं के नीचे लिख देते हैं, तथा अंत में खण्ड़वार योग करने पर अभीष्ट संख्या का धनफल प्राप्त होता हैं।

4.      Ekadhikena Purvena

दो अंकों की किसी भी संख्या का धनफल आनुरूप्येण विस्तार विधि द्वारा ज्ञात किया जाता हैं।

सूत्र पर आधारित विधि -

1.    धनफल के लिए चार खण्ड़ बनाते हैं।

2.    बाँयी ओर से -

         प्रथम खण्ड़ = दहाई अंक का वर्ग x उसका एकाधिक

         दूसरे खण्ड़ = दहाई अंक का वर्ग x विचलन (विचलन = इकाई अंक x 3 10)

         तीसरे खण्ड़ = 3 x दहाई अंक x इकाई अंक का वर्ग

         चौथे खण्ड़ = इकाई अंक का धन लिखते हैं।

 

Example: 443 =44 X 44 X 44

= 42 x 5 / 42 x (4 x 3 10) / 3 x 4 x 42 / 43

= 80 / 32 / 192 / 64

= 80 / 32 / 192 / 64 = 85184

संकेत -

1.    आधार 10, विचलन = 4 x 3 10 = 2

2.    तिरछी रेखा से धन स्थान के चार खण्ड़ करते हैं।

         प्रथम खण्ड़ = दहाई अंक का वर्ग x उसका एकाधिक = 42 x 5 = 16 x 5 = 80

         मध्य खण्ड़ = दहाई अंक का वर्ग x विचलन = 42 x (4 x 3 10) = 16 x 2 = 32

         तृतीय खण्ड़ = 3 x दहाई अंक x इकाई अंक का वर्ग = 3 x 4 x 42 = 12 x 16 = 192

         चौथा खण्ड़ = इकाई अंक का धन = 43 = 64

3.    अभीष्ट धनफल = 85184

 

Example: 1073 = 107 X 107 X 107

= 102 x 11 / 102 x (7 x 3 10) / 3 x 10 x 72 / 73

= 1100 / 1100 / 1470 / 343

= 111 / 1100 / 1470 / 343 = 1225043

संकेत -

1.        आधार 10, विचलन = 7 x 3 10 = 11

2.        तिरछी रेखा से धन स्थान के चार खण्ड़ करते हैं।

         प्रथम खण्ड़ = दहाई अंक का वर्ग x उसका एकाधिक = 102 x 11 = 100 x 11 = 1100

         मध्य खण्ड़ = दहाई अंक का वर्ग x विचलन = 102 x (7 x 3 10) = 100 x 11 = 1100

         तृतीय खण्ड़ = 3 x दहाई अंक x इकाई अंक का वर्ग = 3 x 10 x 72 = 30 x 49 = 192

         चौथा खण्ड़ = इकाई अंक का धन = 73 = 343

3.        अभीष्ट धनफल = 1225043